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चाँद का कुरता

पहेली बूझो

दो पहेलियाँ बूझो।

तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 31 पर 'बूझो तो जानें' में दो पहेलियाँ हैं। पहेली बूझने के लिए हर सुराग को ध्यान से पढ़ो, और फिर ऐसी चीज़ सोचो जिस पर सारे सुराग एक साथ ठीक बैठें।

पहली पहेली है: "तन है मेरा हरा-भरा, रस से रहता सदा भरा। भीतर से हूँ मैं लाल, प्यास बुझाकर पूछूँ हाल।" सुराग देखो: उसका तन (शरीर) बाहर से हरा है; वह रस से भरा रहता है; अंदर से लाल है; और गरमी में प्यास बुझा देता है। ऐसा कौन-सा फल है? तरबूज! (पाठ 2 की निमाड़ी पहेली का उत्तर भी तरबूज ही था — 'हरे मटके का लाल पेट'।)

दूसरी पहेली है: "हम दोनों हैं पक्के मित्र, करते रहते काम विचित्र। पाँच-पाँच सेवक हैं साथ, लेकिन करते कभी न बात।" सुराग देखो: वे दो हैं और हमेशा साथ रहते हैं — पक्के मित्र; वे तरह-तरह के अनोखे (विचित्र) काम करते हैं; हर एक के साथ पाँच-पाँच सेवक हैं; और वे कभी बोलते नहीं।

सोचो — हमारे शरीर में ऐसे कौन-से दो हैं, जिनमें से हर एक की पाँच उँगलियाँ होती हैं? हमारे दोनों हाथ! पाँच-पाँच सेवक हैं हर हाथ की पाँच उँगलियाँ, जो लिखने, खाना खाने, खेलने जैसे सारे काम करती हैं — पर बोलती कभी नहीं। किताब में इसका उत्तर है: हाथ का पंजा।

सुरागों को जोड़कर पहेली बूझते हैं: हरा तन, अंदर से लाल, रस भरा, प्यास बुझाए — तरबूज; दो पक्के मित्र, हर एक के पाँच-पाँच सेवक, जो कभी बात न करें — हाथ का पंजा (दोनों हाथ और उनकी उँगलियाँ)।

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