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साङकेन

साङकेन और होली

साङकेन और होली की तुलना करो।

यह हिस्सा आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 4 'साङकेन' (पृष्ठ 35-36) से है। जब वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर बालटियाँ भरकर पानी डाल रहे हैं और चेहरों पर चावल का आटा लगा रहे हैं, तो उसे होली की याद आ गई। उसने चाऊतान से कहा कि लगता है, ये लोग होली मना रहे हैं। चाऊतान ने बताया कि यह होली नहीं, साङकेन है, और आज से उनका नया वर्ष आरंभ होता है।

तब वल्लरी ने अपने यहाँ की बात बताई। उसके यहाँ भी होली से ही नया वर्ष आरंभ होता है। होली के दिन वे भी एक-दूसरे पर रंगीन पानी डालते हैं और मुँह पर गुलाल लगाते हैं। होली के दूसरे दिन लोग एक-दूसरे से मिलने जाते हैं। उस दिन घरों में कई तरह की मिठाइयाँ और नमकीन बनती हैं, और लोग अतिथियों (मेहमानों) का स्वागत करते हैं।

चाऊतान ने बताया कि उनके यहाँ भी ऐसा ही होता है। आज शाम वे अपने ताऊजी के घर जाएँगे; ताईजी ने तरह-तरह के पकवान बनाए होंगे। वे ताऊजी-ताईजी को प्रणाम करेंगे और उनसे आशीर्वाद लेंगे। और कल चाऊतान की बुआजी और फूफाजी उनके घर आएँगे।

तो दोनों त्योहारों में कितनी बातें मिलती हैं! दोनों से नया वर्ष आरंभ होता है, दोनों में लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और चेहरे पर कुछ लगाते हैं, और दोनों में लोग एक-दूसरे से मिलने जाते हैं। पर कुछ अंतर भी हैं: साङकेन में सादा पानी और चावल का आटा होता है, जबकि होली में रंगीन पानी और गुलाल।

साङकेन में लोगों को पानी डालते और चेहरों पर आटा लगाते देखकर वल्लरी को होली की याद आई, क्योंकि उसके यहाँ भी होली से नया वर्ष आरंभ होता है, रंगीन पानी और गुलाल लगाते हैं, और अगले दिन लोग एक-दूसरे से मिलने जाते हैं।

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