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सुंदरिया

कहानी: सुंदरिया

कहानी 'सुंदरिया' शुरू करो और एक प्यारी गाय से मिलो।

यह कहानी आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 5 'सुंदरिया' (पृष्ठ 46) की है। इसके लेखक जैनेंद्र कुमार हैं। इसे यहाँ अपने शब्दों में पढ़ो।

हरियाणा के एक गाँव में हीरासिंह नाम का एक किसान रहता था। उसके घर में पत्नी थी, बच्चे थे, और एक प्यारी गाय थी — सुंदरिया। हीरासिंह की समझ में नहीं आता था कि वह इन सबका पालन-पोषण कैसे करे।

सुंदरिया डील-डौल में काफ़ी बड़ी गाय थी, इतनी सुंदर कि उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी। पर हीरासिंह बहुत गरीब था। वह गाय के लिए चारा तक नहीं जुटा पाता था। जब घर में खाने-पीने की भी कमी होने लगी, तो उसके मन में आया कि क्यों न सुंदरिया को बेच दे।

पर उसका बड़ा लड़का जवाहरसिंह सुंदरिया को 'मौसी' कहकर बुलाता था। मौसी यानी माँ की बहन — यानी जवाहरसिंह के लिए सुंदरिया घर की एक सदस्य थी। इसलिए हीरासिंह उसे बेचने से डरता था।

आखिर हीरासिंह नौकरी की तलाश में दिल्ली चला आया। वहाँ उसे एक सेठ के घर चौकीदार की नौकरी मिल गई।

गरीब किसान हीरासिंह अपनी प्यारी गाय सुंदरिया का चारा भी नहीं जुटा पाता था, पर उसे बेचने से डरता था क्योंकि उसका बेटा जवाहरसिंह उसे मौसी कहता था; इसलिए वह नौकरी ढूँढ़ने दिल्ली गया और सेठ का चौकीदार बना।

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