सुंदरिया
पहेली बूझो
पाठ के अंत की पहेली बूझो।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 5 'सुंदरिया' में, पृष्ठ 57 पर 'बूझो पहेली' में तीन पहेलियाँ हैं। उन्हें किताब में वहीं पढ़ो। यहाँ हम हर पहेली के सुराग अपने शब्दों में समझेंगे और उत्तर तक पहुँचेंगे। (किताब में उत्तर उसी पृष्ठ पर उलटे छपे हैं।)
पहली पहेली एक पक्षी की है। उसका राग बहुत सुरीला है, पर रंग काला है। वह सबके मन को भाती है, और पेड़ की डाली पर बैठकर मीठे गीत सुनाती है। काला रंग और मीठा गाना — यह कोयल है।
दूसरी पहेली एक जीव की है। वह जल में भी रहता है और थल (ज़मीन) पर भी। उसकी चाल बहुत धीमी है। खतरा दिखते ही वह झट से सिमट जाता है और खुद ही अपनी ढाल बन जाता है — यानी अपने कड़े खोल के भीतर छिप जाता है। यह कछुआ है।
तीसरी पहेली एक चीज़ की है। यह लकड़ी का ऐसा घर है जो पानी में चलता है। यह सबको अपने साथ बिठाकर नदी के पार ले जाता है। यह नाव है।
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