अनुवाद की प्रक्रिया / The Process of Translation
अनुवाद भी एक सृजन है
अनुवाद को सृजनात्मक प्रक्रिया के रूप में दिखाना।
'हंप्टी-डंप्टी' के अनुवाद में एक छोटा-सा बदलाव अर्थ बदल देता है: मूल में राजा के आदमी उसे जोड़ नहीं पाए (मजबूरी), जबकि 'कभी न जोड़ें' सुनकर लगता है कि जोड़ना चाहते ही नहीं (राजा की मंशा पर संदेह)।
'लिटिल मिस मफ़ेट' का अनुवाद 'मुफ़्ती माई' और भी रचनात्मक है: छोटी मेम साहिबा एक भूखी, गरीब बूढ़ी अम्मा बन जाती है, जो घास पर बैठकर बटोरा हुआ खाना खाती है।
यह माई प्रेमचंद की 'बूढ़ी काकी', उदयप्रकाश की बुढ़िया और निराला के 'भिक्षुक' जैसी है; बड़ा-सा मकड़ा किसी अंग्रेज़ का प्रतीक भी हो सकता है — अनुवाद यहाँ प्रतिकार भी बन जाता है।
परिवेश, भाषा और समय के साथ अनुवाद बदलता है: भारतेंदु ने 'मर्चेंट ऑफ़ वेनिस' का अनुवाद 'वेनिस के व्यापारी' नाम से शुरू किया, पर भाषा-नीति बदली तो एक हिस्सा 'वेनिस के सौदागर' नाम से छपा।
इस तरह का अनुवाद रचनात्मक काम माँगता है; फिर भी भाषाओं के बीच आने-जाने के कुछ नियम सीखने होते हैं — यही इस इकाई का विषय है।
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