अनुवाद की प्रक्रिया / The Process of Translation
कविता का भाषांतरण: बाशो का हाइकू
कविता-अनुवाद की बारीकी समझाना।
कविता का अनुवाद वही करे जो कविता की बारीकियाँ जानता हो — शिल्प और काव्य-भाषा से लापरवाही उसकी आत्मा नष्ट कर सकती है।
बाशो (जन्म 1644) ने हाइकू को नया संस्कार दिया: तीन चरण, 17 वर्ण — पहले और तीसरे में पाँच-पाँच, बीच में सात; प्रकृति इसका मुख्य आलंबन।
उनका प्रसिद्ध हाइकू: पुराना तालाब, मेढ़क कूदा, पानी की आवाज़। व्याख्यात्मक अनुवाद खोलता है कि आशय जड़ता को तोड़ती गति है — जमे तालाब में मेढ़क की छलाँग से गहरी हलचल।
हिंदी काव्यानुवाद का 'गुड़प' गलत चित्र देता है — गुड़प कंकड़ गिरने की गतिहीन आवाज़ है; जीवित मेढ़क से 'छप' या 'छपाक' होता।
टैगोर ने विवाद से बचते हुए तीसरे चरण को बांग्ला में 'जल की ध्वनि' कहा — कैसी ध्वनि, यह पाठक तय करे; पाठ एक नया अनुवाद भी सुझाता है: 'ताल पुराना / थिरक उठा, जब / कूदा दादुर'।
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